आरोग्यम्
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एक्यूपंक्चर, योग व प्राकृतिक चिकित्सा के समन्वय से दर्द व स्नायु-रोगों का प्रबंधन।
सर्वाइकल स्पॉण्डलाइटिसगर्दन की हड्डियों व गद्दियों में उम्र या मुद्रा के कारण आने वाला बदलाव सर्वाइकल स्पॉण्डलाइटिस कहलाता है। इससे गर्दन में जकड़न, दर्द, तथा कंधे व बाँह तक फैलने वाली टीस होती है। आरोग्यम् में इसका उपचार एक्यूपंक्चर, योग व मुद्रा-सुधार के समन्वय से किया जाता है।और पढ़ें
स्लिप डिस्करीढ़ की दो हड्डियों के बीच की गद्दी (डिस्क) अपनी जगह से खिसककर नस पर दबाव डालने लगे, तो इसे स्लिप डिस्क कहते हैं। इससे कमर में दर्द और प्रायः एक पैर में फैलती टीस होती है। आरोग्यम् में इसका उपचार इलेक्ट्रो-एक्यूपंक्चर, विशेष योगाभ्यास व विश्राम-मुद्रा के समन्वय से किया जाता है।और पढ़ें
फेशियल पैरालिसिस (लकवा)चेहरे की नस प्रभावित होने पर एक ओर की मांसपेशियाँ काम करना बंद कर देती हैं — मुँह टेढ़ा हो जाता है और आँख बंद नहीं हो पाती। इसे फेशियल पैरालिसिस या बेल्स पाल्सी कहते हैं। आरोग्यम् में इसका उपचार चेहरे के एक्यूपंक्चर तथा मांसपेशी-अभ्यास से किया जाता है। इसमें उपचार जल्दी आरंभ होना सबसे महत्वपूर्ण है।और पढ़ें
कमर दर्द व लंबर स्पॉण्डलाइटिसकमर दर्द सबसे सामान्य शिकायत है, और अधिकांश मामलों में इसका कारण कोई गंभीर रोग नहीं, बल्कि मांसपेशियों की जकड़न, कमज़ोरी और लंबे समय की ग़लत मुद्रा होती है। आरोग्यम् में एक्यूपंक्चर से दर्द घटाया जाता है और योग चिकित्सा से कमर को वह सहारा दिया जाता है जिससे दर्द लौटे नहीं।और पढ़ें
साइटिकासाइटिका कोई अलग रोग नहीं, बल्कि साइटिक नस के दबने या उत्तेजित होने का लक्षण है — कमर से कूल्हे होते हुए पैर तक जाती टीस। कारण प्रायः स्लिप डिस्क या कूल्हे की पिरिफ़ॉर्मिस मांसपेशी का कड़ापन होता है। आरोग्यम् में एक्यूपंक्चर से नस के आसपास की जकड़न घटाई जाती है और योग से उसका कारण सुधारा जाता है।और पढ़ें
घुटनों का दर्द व गठियाआयु बढ़ने के साथ घुटने की गद्दी (कार्टिलेज) घिसने से दर्द, सूजन व सीढ़ी चढ़ने में कठिनाई होती है। इसे ऑस्टियोआर्थराइटिस कहते हैं। आरोग्यम् में एक्यूपंक्चर से दर्द व सूजन घटाई जाती है, तथा वज़न-प्रबंधन व सुरक्षित अभ्यास से घुटने पर भार कम किया जाता है।और पढ़ें
जीवनशैली से जुड़े रोगमधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, थायरॉइड व पाचन-विकार — ये रोग प्रायः वर्षों की दिनचर्या, आहार, नींद व तनाव से बनते हैं। आरोग्यम् में इनका प्रबंधन आहार-योजना, योग चिकित्सा व दिनचर्या-सुधार से किया जाता है, आपके चिकित्सक के उपचार के साथ-साथ।और पढ़ें
अनियंत्रित डायबिटीजदवाएँ चलने के बाद भी जब रक्त-शर्करा बार-बार बढ़ती-घटती रहे, तो उसे अनियंत्रित डायबिटीज कहते हैं। इसका कारण प्रायः केवल दवा नहीं — भोजन का समय व स्वरूप, नींद, तनाव व दिनचर्या होती है। आरोग्यम् में इसका प्रबंधन DIP आहार, सरकेडियन थेरेपी व योग के समन्वय से किया जाता है — चल रही दवाओं के साथ।और पढ़ेंसोम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि · अपराह्न 3 से रात्रि 8 बजे तक · कोतवालपुरा, बांसफाटक, वाराणसी