
लक्षण
सर्वाइकल के रोगी प्रायः इन शिकायतों के साथ आते हैं:
- सुबह उठने पर गर्दन में जकड़न, जो हिलाने पर धीरे-धीरे कम होती है
- गर्दन घुमाने पर दर्द या "कट-कट" जैसी आवाज़
- कंधे, कंधे की हड्डी के बीच या बाँह तक फैलता दर्द
- हाथ या उँगलियों में झुनझुनी, सुन्नपन या कमज़ोरी
- लंबे समय तक झुककर काम करने या मोबाइल देखने के बाद बढ़ता दर्द
- कभी-कभी चक्कर या सिर के पिछले भाग में भारीपन
यदि हाथों की पकड़ लगातार कमज़ोर हो रही हो, चलने में लड़खड़ाहट हो, या मल-मूत्र पर नियंत्रण प्रभावित हो — तो यह गंभीर संकेत है; तुरंत किसी न्यूरो-विशेषज्ञ को दिखाएँ।
आरोग्यम् में उपचार कैसे होता है
पहली बैठक में दर्द का स्वरूप, अवधि, आपका काम व बैठने की मुद्रा, तथा उपलब्ध एक्स-रे या MRI रिपोर्ट देखी जाती है। उसके बाद उपचार-योजना बनती है।
एक्यूपंक्चर व इलेक्ट्रो-एक्यूपंक्चर
गर्दन, कंधे व बाँह के चयनित बिंदुओं पर महीन सूइयाँ लगाई जाती हैं। जकड़ी हुई मांसपेशियाँ ढीली होने से दर्द व फैलती टीस में राहत मिलती है। पुराने मामलों में सूइयों पर अत्यंत हल्का विद्युत-प्रवाह (इलेक्ट्रो-एक्यूपंक्चर) जोड़ा जाता है।
योग चिकित्सा
गर्दन के लिए झटके वाले या गोल घुमाने वाले व्यायाम प्रायः हानि करते हैं। इसके स्थान पर स्थिर-बल (isometric) अभ्यास, कंधों को सहारा देने वाले आसन व प्राणायाम सिखाए जाते हैं — घर पर करने योग्य 10–15 मिनट की योजना के साथ।
मुद्रा व दिनचर्या
तकिये की ऊँचाई, कंप्यूटर व मोबाइल की स्थिति, तथा हर घंटे उठकर विराम — इन तीनों में सुधार के बिना दर्द लौटता रहता है। परामर्श में यह विस्तार से बताया जाता है।
आहार
सूजन बढ़ाने वाले भोजन में कमी तथा कैल्शियम व विटामिन-D की स्थिति पर ध्यान — एम.एससी. (खाद्य पोषण) योग्यता के अनुसार सुझाव दिए जाते हैं।
उपचार में प्रयुक्त पद्धतियाँ
