
पंचकर्म आयुर्वेद की शुद्धि-चिकित्सा है — शरीर में संचित विकारों को बाहर निकालकर धातुओं को संतुलित करने की विधियाँ। केंद्र पर दर्द व जोड़ों के रोगों में उपयोगी पंचकर्म विधियाँ चिकित्सक की देखरेख में दी जाती हैं।
केंद्र पर उपलब्ध विधियाँ
- स्वेदन — औषधीय वाष्प से मांसपेशियों की जकड़न व दर्द में राहत
- पिचु — औषधीय तेल में भीगी पट्टी का प्रयोग — घुटने व जोड़ों के दर्द हेतु
- ग्रीवा-वस्ति — गर्दन पर औषधीय तेल का कुंड — सर्वाइकल स्पॉण्डलाइटिस हेतु
- कटि-वस्ति — कमर पर औषधीय तेल का कुंड — कमर दर्द व स्लिप डिस्क हेतु
- वस्ति — आँतों की शुद्धि, क्रमबद्ध विधि से
उपचार का क्रम
रोग व शारीरिक बल देखकर विधि व अवधि तय होती है — प्रायः 7 से 21 दिनों का क्रम। पंचकर्म को एक्यूपंक्चर व योग के साथ जोड़ने पर जोड़ों के पुराने दर्द में प्रायः बेहतर परिणाम मिलते हैं।
इन रोगों में उपयोगी
