
लक्षण
यह प्रायः अचानक, कुछ घंटों में उभरता है:
- चेहरे के एक ओर का भाग ढीला पड़ जाना, मुँह का टेढ़ा दिखना
- एक आँख पूरी तरह बंद न हो पाना; आँख का सूखना या लगातार पानी आना
- कुल्ला करते समय या पीते समय पानी का एक ओर से बहना
- माथे पर बल न डाल पाना, भौं न उठा पाना
- कान के पीछे दर्द, तेज़ आवाज़ें असहज लगना, स्वाद में परिवर्तन
यदि इसके साथ हाथ-पैर में कमज़ोरी, बोलने में लड़खड़ाहट या देखने में परिवर्तन हो, तो यह आघात (स्ट्रोक) का संकेत हो सकता है — तुरंत निकटतम अस्पताल जाएँ, प्रतीक्षा न करें।
आरोग्यम् में उपचार कैसे होता है
सबसे पहले यह देखा जाता है कि लक्षण कब आरंभ हुए और कारण क्या हो सकता है। लकवा आरंभ होने के जितनी जल्दी उपचार शुरू हो, स्थिति सामान्यतः उतनी बेहतर सँभलती है।
चेहरे का एक्यूपंक्चर
चेहरे, कनपटी व हाथ के चयनित बिंदुओं पर अत्यंत महीन सूइयाँ लगाई जाती हैं। इससे प्रभावित मांसपेशियों में रक्त-संचार व सक्रियता बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। सूइयाँ चेहरे पर बहुत हल्की लगाई जाती हैं।
एक्यूप्रेशर व मांसपेशी-अभ्यास
रोगी को दर्पण के सामने करने योग्य अभ्यास सिखाए जाते हैं — भौं उठाना, आँख बंद करना, गाल फुलाना, सीटी की मुद्रा — दिन में कई बार, थोड़े-थोड़े समय के लिए।
आँख की सुरक्षा
जब आँख पूरी तरह बंद न हो, तो कॉर्निया सूखकर क्षतिग्रस्त हो सकता है। दिन में चश्मा, तथा रात में आँख ढकने व चिकित्सक द्वारा बताए गए आई-ड्रॉप का उपयोग — यह उपचार का अनिवार्य भाग है।
संयोजित देखभाल
यदि रोगी पहले से किसी चिकित्सक की दवा ले रहा है, तो उसे जारी रखा जाता है। यहाँ कोई दवा बंद करने की सलाह नहीं दी जाती।
उपचार में प्रयुक्त पद्धतियाँ
