लक्षण
माइग्रेन को साधारण सिरदर्द से इन बातों से अलग पहचाना जाता है:
- सिर के एक ओर धड़कता हुआ दर्द, जो कई घंटों से एक-दो दिन तक रह सकता है
- जी मिचलाना या उल्टी
- तेज़ रोशनी, आवाज़ या गंध से दर्द का बढ़ना
- दर्द से पहले आँखों के आगे चमक, टेढ़ी रेखाएँ या धुँधलापन (ऑरा)
- हिलने-डुलने या सीढ़ी चढ़ने पर दर्द का बढ़ना
- दौरे के बाद कई घंटों तक थकान व सुस्ती
अचानक आया अब तक का सबसे तेज़ सिरदर्द, बुख़ार व गर्दन की अकड़न के साथ सिरदर्द, या सिरदर्द के साथ कमज़ोरी व बोलने में कठिनाई — तुरंत अस्पताल जाएँ।
आरोग्यम् में उपचार कैसे होता है
माइग्रेन में सबसे महत्वपूर्ण कार्य यह पता लगाना है कि आपके दौरे किन कारणों से शुरू होते हैं। परामर्श में एक "सिरदर्द डायरी" बनाना सिखाया जाता है — दौरे का समय, उससे पहले का भोजन, नींद, तनाव व मासिक-चक्र का संबंध।
एक्यूपंक्चर
सिर, कनपटी, गर्दन तथा हाथ-पैर के चयनित बिंदुओं पर सूइयाँ। दौरे के बीच के दिनों में नियमित बैठकें, ताकि आवृत्ति पर काम हो — न कि केवल दौरे के समय।
प्राणायाम व शिथिलीकरण
अनुलोम-विलोम व भ्रामरी, तथा शवासन में शिथिलीकरण — तनाव माइग्रेन का सबसे सामान्य ट्रिगर है।
आहार व दिनचर्या
भोजन का समय न छोड़ना, पर्याप्त जल, नियमित नींद तथा व्यक्तिगत खाद्य-ट्रिगर (कुछ रोगियों में अत्यधिक चाय-कॉफ़ी, पुराना पनीर, अधिक तला-भुना) की पहचान।
दवा जारी रखें
यदि आपके चिकित्सक ने माइग्रेन की दवा दी है, उसे अपने आप बंद न करें। एक्यूपंक्चर उसके साथ चल सकता है।
उपचार में प्रयुक्त पद्धतियाँ
