
बी.एन.वाई.एस. योग्यता के साथ पारंपरिक प्राकृतिक चिकित्सा — शरीर की स्वयं की रोग-निवारण क्षमता को जगाने वाली विधियाँ, बिना दवा, बिना दुष्प्रभाव।
प्रमुख विधियाँ
- जल चिकित्सा — गर्म-ठंडे जल के प्रयोग, स्नान व पट्टियाँ — रक्त-संचार व दर्द हेतु
- मिट्टी चिकित्सा — पेट व त्वचा के विकारों तथा शरीर की गर्मी शांत करने हेतु
- वस्ति — आयुर्वेदिक विधि से आँतों की शुद्धि, चिकित्सक की देखरेख में
- वाष्प चिकित्सा (भाप-स्नान) — मांसपेशियों की जकड़न व शरीर-शुद्धि हेतु
- उपवास-चिकित्सा — निगरानी में; प्रत्येक रोगी हेतु नहीं
किन रोगों में उपयोगी
जोड़ों का दर्द, गठिया, पाचन-विकार, मोटापा, त्वचा-रोग तथा जीवनशैली से जुड़े रोग। रोग व ऋतु देखकर विधियों का चयन होता है और आवश्यकता अनुसार इन्हें एक्यूपंक्चर, योग व आहार चिकित्सा के साथ जोड़ा जाता है।
इन रोगों में उपयोगी
