
लक्षण
स्लिप डिस्क के रोगी प्रायः बताते हैं:
- कमर में गहरा दर्द, जो झुकने, खाँसने या छींकने पर बढ़ता है
- कूल्हे से जाँघ व पिंडली होते हुए पैर तक जाती टीस (प्रायः एक ही पैर में)
- पैर या पंजे में झुनझुनी, सुन्नपन या जलन
- देर तक बैठने या खड़े रहने पर दर्द का बढ़ना
- सीधा लेटकर पैर उठाने पर तेज़ दर्द
दोनों पैरों में कमज़ोरी, पेशाब या मल पर नियंत्रण का जाना, या जाँघों के भीतरी भाग का सुन्न होना — ये आपातकालीन संकेत हैं। ऐसी स्थिति में बिना देर किए अस्पताल जाएँ।
आरोग्यम् में उपचार कैसे होता है
उपचार से पहले MRI या एक्स-रे रिपोर्ट, दर्द का मार्ग तथा किन गतिविधियों से दर्द बढ़ता है — यह देखा जाता है। इसी से यह तय होता है कि कौन-से अभ्यास आपके लिए सुरक्षित हैं।
इलेक्ट्रो-एक्यूपंक्चर
कमर व पैर के चयनित बिंदुओं पर सूइयाँ लगाकर अत्यंत हल्का विद्युत-प्रवाह दिया जाता है। इससे नस के आसपास की जकड़न व सूजन घटती है और फैलती हुई टीस में राहत मिलती है।
विशेष योगाभ्यास
स्लिप डिस्क में आगे झुकने वाले आसन (जैसे पश्चिमोत्तानासन) हानि पहुँचा सकते हैं — इन्हें टाला जाता है। इसके स्थान पर कमर को सहारा देने वाले हल्के अभ्यास, पेट व कूल्हे की मांसपेशियों को सक्रिय करने वाली क्रियाएँ, तथा श्वास-अभ्यास सिखाए जाते हैं।
दैनिक सावधानियाँ
भारी वज़न उठाने का सही तरीका, बैठने की अवधि, तथा गद्दे व सोने की मुद्रा — इनमें छोटे परिवर्तन दर्द की पुनरावृत्ति काफ़ी घटाते हैं।
आहार व वज़न
अतिरिक्त वज़न कमर की डिस्क पर सीधा भार है। आवश्यकता होने पर क्रमिक वज़न-प्रबंधन की योजना दी जाती है।
उपचार में प्रयुक्त पद्धतियाँ
