
लक्षण
अनियंत्रित डायबिटीज के रोगी प्रायः ये अनुभव लेकर आते हैं:
- दवा नियमित लेने पर भी फ़ास्टिंग या PP शुगर बार-बार बढ़ी मिलना
- HbA1c रिपोर्ट लगातार लक्ष्य से ऊपर रहना
- बार-बार प्यास, पेशाब व थकान
- पैरों में झुनझुनी या जलन
- घाव देर से भरना, बार-बार संक्रमण
- वज़न का बढ़ते या घटते जाना
यदि शुगर 300 से ऊपर बनी रहे, बेहोशी जैसा लगे, या पैर में घाव बिगड़ रहा हो — तुरंत अपने चिकित्सक या अस्पताल से संपर्क करें।
आरोग्यम् में उपचार कैसे होता है
पहली बैठक में आपकी दवाएँ, जाँच-रिपोर्ट (HbA1c, फ़ास्टिंग/PP), भोजन-क्रम, नींद व दिनचर्या देखी जाती है। दवाएँ बंद कराए बिना, उनके साथ योजना बनती है।
आहार चिकित्सा (DIP डाइट)
दिन की शुरुआत फलों से, भोजन में कच्ची सब्ज़ियों व अंकुरित अन्न का अनुपात अधिक, तथा प्रसंस्कृत भोजन व अतिरिक्त चीनी में क्रमिक कमी — एम.एससी. (खाद्य पोषण) योग्यता के अनुसार वैयक्तिक योजना।
सरकेडियन थेरेपी
भोजन का समय रक्त-शर्करा पर उतना ही असर डालता है जितना भोजन का स्वरूप। सूर्योदय के बाद पहला व सूर्यास्त के आस-पास अंतिम भोजन, नियत निद्रा-क्रम व प्रातः धूप — यह क्रम शर्करा-नियंत्रण में सहायक होता है।
योग व प्राणायाम
नियमित आसन-क्रम, प्राणायाम व ध्यान — तनाव-हार्मोन घटाने व इंसुलिन-संवेदनशीलता सुधारने हेतु। प्रत्येक रोगी को घर की 15–20 मिनट की योजना दी जाती है।
समीक्षा
हर 4–6 सप्ताह में जाँच-रिपोर्ट के साथ प्रगति की समीक्षा होती है। दवा घटाने का कोई भी निर्णय आपकी रिपोर्ट देखकर आपके चिकित्सक का ही होगा।
उपचार में प्रयुक्त पद्धतियाँ
