
हमारा शरीर सूर्य के साथ चलने वाली एक जैविक घड़ी (सरकेडियन रिदम) से नियंत्रित होता है। जब सोना, जागना व भोजन इस घड़ी के विरुद्ध चलते हैं, तो पाचन, नींद, रक्त-शर्करा व मन — सब पर प्रभाव पड़ता है। सरकेडियन थेरेपी इसी घड़ी को पुनः व्यवस्थित करने की चिकित्सा है।
इसमें क्या-क्या सुधारा जाता है
- निद्रा-क्रम — सोने-जागने का नियत समय; रात्रि में स्क्रीन व तेज़ प्रकाश से दूरी
- भोजन-समय — सूर्योदय के बाद पहला व सूर्यास्त के आस-पास अंतिम भोजन
- सूर्य-प्रकाश — प्रातःकालीन धूप व खुली हवा में अभ्यास
- दिनचर्या — आयुर्वेदिक दिनचर्या के सिद्धांतों से मेल
किन रोगों में उपयोगी
अनियंत्रित मधुमेह, मोटापा, अनिद्रा, माइग्रेन, थकान व पाचन-विकार — विशेषकर वे रोगी जिनकी दिनचर्या रात्रि-पाली या अनियमित समय की है। यह चिकित्सा प्रायः आहार चिकित्सा व योग के साथ संयोजित होती है।
इन रोगों में उपयोगी
