
लो-लेवल लेज़र थेरेपी (कोल्ड लेज़र) में अत्यंत हल्की लेज़र किरणें दर्द वाले भाग पर डाली जाती हैं। इसमें न चीरा है, न सूई, न ताप — किरणें ऊतकों की मरम्मत की स्वाभाविक प्रक्रिया को गति देती हैं।
उपचार कैसे होता है
दर्द वाले बिंदुओं पर लेज़र यंत्र कुछ मिनट रखा जाता है। एक बैठक प्रायः 10–20 मिनट की होती है और रोगी को केवल हल्का स्पर्श महसूस होता है। यह विधि एक्यूपंक्चर-बिंदुओं पर भी प्रयोग की जाती है — सूई से डरने वाले रोगियों हेतु विशेष उपयोगी।
किन रोगों में उपयोगी
- घुटने व जोड़ों का दर्द, गठिया
- कमर व गर्दन का दर्द
- मांसपेशियों की चोट व सूजन
- घाव-भरण में सहायता
इन रोगों में उपयोगी
